साल 2024 में भारत के ज्यादातर पड़ोसी देशों में राजनीतिक उथल-पुथल मची रही थी. कई ऐसी घटनाएं हुईं जिससे भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों में कहीं-कहीं कड़वाहट महसूस हूई.
बांग्लादेश से लेकर मालदीव तक ने भारत को कई मौकों पर मुश्किल में डालने की कोशिश कि. वहीं पर चीन के साथ सीमा के विवाद पर प्रगति भी देखने को मिली.
साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने पहली बार भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी, तभी बहुत देशों के प्रमुख भारत आए थे.
शपथ समारोह और उसके बाद के शुरुआती सालों में प्रधान मंत्री मोदी ने सिर्फ पड़ोसी देशों की यात्रा की थी. इससे साफ हो गया कि भारत की विदेश नीति में पड़ोसी देशों को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाएगा.
इस नीति को औपचारिक तौर पर neibhorhood first या ‘पड़ोसी सबसे पहले’ के तौर पर जाना गया. हालांकि इस नीति की अवधारणा 2008 में सामने लाई गई थी.
इसे अफगानिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के साथ के संबंधों को सुधार करने के लिए तैयार किया गया था